Saturday, February 6, 2010

तुम बिन ...



तुम बिन जीना भी है मुश्किल


और मरना भी कहाँ है आसां ,


रास्ते जुदा हो जायेंगे मगर


फासले आ न सकेंगे दरमियाँ


रहगुज़र तुम बिन न होगी मुकम्मिल


हासिल न होंगे मंजिल के निशान ,


जमीन अपनी धुरी बदल दे चाहे


चाँद लेता रहेगा आसमान की पनाह


आरजुएं तुमने जगा दी दिल में


दास्ताँ कहती रहेगी अब शमा ,


हाथों में तेरा नाम न था मगर


तकदीर हम पर हो गयी मेहरबां


11 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बहुत सुंदर.

Udan Tashtari said...

हाथों में तेरा नाम न था मगर
तकदीर हम पर हो गयी मेहरबां


-बहुत बढ़िया.

apnesapne said...

kya likh diya hai apne.. ultimate...
Nishabd kar diya.. meri kalam ko

निर्मला कपिला said...

तुम बिन जीना भी है मुश्किल

और मरना भी कहाँ है आसां ,
बहुत बडिया रचना है धन्यवाद शुभकामनायें

RaniVishal said...

Bahut bhadiya rachana, bahut gahre bhav pad kar bahut accha laga .....Aabhar!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा said...

तुम बिन जीना भी है मुश्किल
और मरना भी कहाँ है आसां ,
रास्ते जुदा हो जायेंगे मगर
फासले आ न सकेंगे दरमियाँ

अच्छा लिखा है .... कुछ भी आसान नही होता उन के बिना ..... १०० प्रतिशत सच ........

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

तुम बिन जीना भी है मुश्किल....
चाँद लेता रहेगा आसमान की पनाह ...
हाथों में तेरा नाम न था मगर
तकदीर हम पर हो गयी मेहरबां
सुन्दर शब्दों को संजोकर पेश करना एक कला है.
और वो आपकी रचना में साफ़ झलक रहा है

नीरज गोस्वामी said...

अति भावपूर्ण रचना...बधाई...
नीरज

अनिल कान्त : said...

रचना के भाव दिल के करीब जाने पड़ते हैं. एक अच्छी रचना पढने को मिली

"अर्श" said...

samvedanshil kahunga is rachanaa ko ... behad prabhaavi..


arsh

Pushpa Bajaj said...

इतना दर्द कह से लाये दोस्त !

कुछ सुबह की कुछ रौशनी की भी बात करे न !

bahut feeling hai ! Thanks.