Tuesday, May 14, 2013

रात डाकिया बनकर आती है ,
प्यार के इन्द्रधनुष वाला 
ख़त तुम्हारा लेकर , 

जो लिखा था शाम को तुमने 
और मेज़ पर ही छोड़ आये थे ....

ये रंग हैं या लफ्ज़ तुम्हारे 
हया से आते जाते हैं , 
ख्वाब बनकर सुनहरा ये 
चांदनी रात में आते है ....

रात ढलेगी होगा उजाला 
गुलमोहर ये बन जायेंगे , 
चुन चुन कर उँगलियों से 
घर अपने ले आयेंगे ....

3 comments:

संदीप 'शालीन ' said...


रात ढलेगी होगा उजाला 
गुलमोहर ये बन जायेंगे , 
चुन चुन कर उँगलियों से 
घर अपने ले आयेंगे ....

बहुतखूब ! मृदु भावों की सरस प्रस्तुति हेतु बधाई ........

pukhraaj said...

thanx sandeep ji

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...