Sunday, May 13, 2012

meri pyari maa ka gaya hua bhajan ,... jise aaj mother's day par aap sab ke sath share kar rahi hoon /////












संत लोग सब मिलकर खेलो 
ताश रे सांवरिया .....
ताश रे सांवरिया , हरि गुण गाओ रे सांवरिया ....
संत लोग सब मिलकर खेलो ../.../.
दुग्गी को दिल से निकाल दो 
एक रूप सब को जानो |
तिग्गी में है तीन लोक 
तुम अगम रूप से पहचानो |
चौग्गी में है चतुर्भुजी भगवान् रे सांवरिया .....
संत लोग सब मिलकर खेलो .....
पंजे में है पांच तत्व 
जिनसे शरीर तैयार हुआ |
छाग्गे में है षष्ट तत्व 
जो काम क्रोध को जीत लिया |
सत्ते में है सतनारायण की मूर्ती सांवरिया ....
संत लोग सब मिलकर खेलो ....
अट्ठे में है अष्टभुजी 
श्री माता दुर्गे कल्याणी |
नहले में निहाल कर देंगी 
ऐसी माता वरदानी |
दहले में है दयासिन्धु भगवान् रे सांवरिया ...
संत लोग सब मिलकर खेलो ......
गुल्मे को जब जीत लिया 
तो बेगम पर भी वार किया |
आप बादशाह बन बैठे 
न इक्के का कुछ  ख्याल किया |
इक्के में बैठा मनवा स्वर्ग लोक को जाता है ....
राधे राधे राधे राधे श्याम रे सांवरिया .....
राधे राधे राधे राधे श्याम रे सांवरिया .....

5 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत प्रभावित करती रचना
आपकी रचना जितनी बार पढिए, लगता है पहली बार पढ रहा हूं।

मनोज भारती said...

गहरी बात...ताश के पत्तों के माध्यम से ईश वंदना!!!

pukhraaj said...

thanx sanjay ji

pukhraaj said...

manoj ji is bhajan ko meri maa gaya karti thi .. mujhe bhi ye bhajan bachpan se hi bhaata tha kyunki likhne waale ne bahut khoobsurti se taash ke patton ke maadhyam se jeevan ki vyakhya ki hai .. aaj aap sab ke sath share kar liya . ..

Vinay Prajapati said...

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ... आशा है नया वर्ष न्याय वर्ष नव युग के रूप में जाना जायेगा।

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