Saturday, June 6, 2009

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन ....

वो बीज ,
अपने सारे अरमान ,
नवयुग का जो करे निर्माण ,
लेकर अपने सीने में ,
छुपा हुआ था
धरती के अंधकारमय गर्भगृह के भीतर ।
पाकर सावन का गीला सा स्पर्श ,
म्रदुल और स्वप्निल हवाओं का ,
थाम कर दामन ,
प्रतिक्षण नवीन ऊँचाइयों तक
जाने को बेचैन था मन ।
मगर हवा यहाँ की बदली है ,
खेतों की जगह इमारत ने ली है ,
अब भी सावन बरसा करता है ,
अब भी सूरज ने अपना पथ नही बदला है ,
पर वो बीज ....
वो बीज ,
इन सब के बीच ,
अपने अरमानों की
जड़ें ढूँढा करता है ....

9 comments:

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया पोस्ट. धन्यवाद.

Kishore Choudhary said...

अपने अरमानों की
जड़ें ढूँढा करता है ....

बहुत खूब !

गौतम राजरिशी said...

एक बहुत ही अच्छी रचना!
यकीनन...

omsherryom said...

u'r best post till date....loved it...k.i.u...

omsherryom said...

k.i.u. is keep it up...

apnesapne said...

aaaj post dekhkar mujhe kishor ji ka geet yaad aa gaya.. music is my weakness..
do line likh raha hoon....

mai Akelaa to naa tha
thy mere saathi kai
ek Aandhi sai uthi
jo Bhi tha le ke gayi
eise Bhi din thy kabhi
meri duniya thi meri

bete hue din vo hay
pyare palchin..

pukhraaj said...

मेरी नयी पोस्ट " कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन"
पसंद करने का आप सभी का शुक्रिया .... इसी
तरह हौसलाफजाई करते रहिएगा ..... साथ ही
कुछ कामिया हो तो उन्हे भी बताते रहिए...

राज भाटिय़ा said...

अजी बहुत प्यारी ओर सुंदर रचना के लिये आप का धन्यवाद

मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे

दर्पण साह "दर्शन" said...

पर वो बीज ....
वो बीज ,
इन सब के बीच ,
अपने अरमानों की
जड़ें ढूँढा करता है ..

wah......

This is the destiny.

jadein to kho gayi hain....
aadmi aur beez dono ki....

...ismein imaratoon ki kai wakai galti hai?